IndiaInternational

अमेरिका में अच्छा खासा चल रहे बिजनेस को ठुकरा कर भारत लौटा यह शख्स, अब तक 6 हजार जानवरों की कर चुका है मदत

कहते हैं इस पृथ्वी पर इंसान सबसे दयालु माना जाता है और यह दयालुता की भावना इंसान में इसलिए है ताकि यह अन्य जानवरों को तथा अन्य लोगों की मदद कर सकें. हालांकि, आज के समय में ज्यादातर लोगों में यह दयालुता की भावना खत्म होते हुए देखी जा सकती है. आज के समय में लोग जानवरों की बिल्कुल भी कदर नहीं करते हैं लेकिन आज भी बहुत से ऐसे लोग हैं जो जानवरों के लिए अपना जीवन न्योछावर कर रहे हैं और उन्हीं लोगों में से एक नाम पीपल फॉर्म के फाउंडर रॉबिन सिंह है.

दरअसल, रॉबिन सिंह की कहानी शुरू होती है इनके बचपन से जब यह छठवीं क्लास में थे. रॉबिन सिंह का जन्म दिल्ली में हुआ था और यह काफी अच्छे परिवार से बिलॉन्ग करते हैं. जब यह छोटे थे तो इनके घर पर पहली बार कंप्यूटर आया था और कंप्यूटर के प्रति इनका इंटरेस्ट काफी ज्यादा बढ़ने लगा और धीरे-धीरे इन्होंने हैकिंग सीखना शुरू किया. इसके बाद किसी दोस्त ने इन्हें बताया की फ्रीलांस काम करके घर बैठे पैसे कमा सकते हैं.

जिसके बाद इन्होंने अपने स्किल्स का उपयोग करके घर बैठे काम करना शुरू कर दिया. रॉबिन इंडिया में बैठकर डॉलर में कमा रहे थे. हालांकि, इसके बाद रॉबिन सिंह ने फैसला किया कि यह अमेरिका जाएंगे और इसके बाद यह अमेरिका चले गए लेकिन अमेरिका जाने के बाद रॉबिन को एहसास हुआ कि यहां रहना काफी ज्यादा महंगा है. यहां सिर्फ फ्रीलांस काम से घर नहीं चल पाएगा यही कारण है कि इन्होंने एक बिजनेस शुरू किया और इनका बिज़नस चल पड़ा और इन्होंने अमेरिका में घर भी ले लिया और लगभग सफल हो चुके थे.

लेकिन यह अपनी लाइफ से खुश नहीं थे और यही कारण है कि इन्होंने वापस इंडिया आने का फैसला किया इसके बाद यह इंडिया में आए और लगातार 18 महीने तक ट्रैवलिंग किया. ट्रैवलिंग के बाद भी इन्हें क्लियर नहीं हुआ कि आखिर इन्हें लाइफ में करना क्या है. हालांकि, एक बार यह तमिलनाडु गए थे और तमिलनाडु में जाकर इनकी पूरी दुनिया ही बदल गई. दरअसल, यहां पर इन्होंने लौरेन नाम की महिला को देखा जो लोगों से बचे हुए खाने को दान देने की अपील करती थी और उन खानों को ले जाकर कुत्तों को खिलाती थी. रॉबिन यह देखकर काफी अच्छा लगा और इसके बाद इन्होंने उस महिला के साथ मिलकर पीपल फॉर्म की स्थापना कर दी.

बता दें कि रॉबिन सिंह का फॉर्म हिमाचल में स्थित है और अभी तक इन्होंने अपने पीपल फॉर्म की मदद से लगभग 6000 से ज्यादा जानवरों की मदद की है. दरअसल, रॉबिन सिंह और उनकी पूरी टीम आवारा जानवरों की मदद करती हैं और उन्हें खाना खिलाने का काम भी करती हैं. आज रॉबिन सिंह के इस बेहतरीन कार्य के वजह से कई जानवरों की जान बच सकी है. रॉबिन सिंह अपने लाइफ से आज काफी ज्यादा खुश हैं. रॉबिन सिंह कहते हैं कि मुझे जानवरों की मदद करके जितनी ज्यादा खुशी मिलती है उतनी ज्यादा खुशी कहीं नहीं मिलती है.

Back to top button