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गुजरात की वो रानी जिसने मोहम्मद गौरी को चटा दी थी धूल, जान बचाकर भागना पड़ा था मुस्लिम शासक मोहम्मद गौरी को

हमारे देश में कई लोगों ने राज करने का प्रयास किया जी हां कई विदेशी शासकों ने हमारे देश पर आक्रमण करके हमारे देश की संपत्ति को लूटने का प्रयास किया. हालांकि, हमारे देश के कई राजाओं ने इन्हें सबक सिखाने का भी काम किया और तो और कई वीरांगनाओं ने भी इन्हें सबक सिखाने का काम किया. इतिहास में जितना जिक्र राजाओं के बारे में किया गया है उतना जिक्र हमारे देश की वीरांगनाओं के बारे में नहीं किया गया लेकिन आज के इस लेख में हम आपको हमारे देश की एक ऐसी वीरांगना के बारे में बताने वाले हैं जिसने मोहम्मद गौरी को युद्ध में धूल चटा दिया था.

मुस्लिम शासक मोहम्मद गौरी ने भारत पर 1175 ईस्वी से 1206 ईस्वी के बीच कई बार युद्ध किया था और इसने इस युद्ध में हमारे देश के कई राजाओं को हरा दिया था और इसने हमारे देश के कई राज्य को अपने कब्जे में कर लिया था. लेकिन क्या आपको पता है मुस्लिम शासक मोहम्मद गौरी को हमारे देश की 1 रानी ने युद्ध में धूल चटा दिया था.

दरअसल, 1178 ईस्वी में मोहम्मद गौरी ने सबसे पहले गुजरात राज्य के जरिए भारत में घुसने की कोशिश करनी शुरू की थी. हालांकि, इस दौरान इसको गुजरात की रानी नायकी देवी से युद्ध करना पड़ा था और इस युद्ध में इस रानी ने मोहम्मद गौरी को धूल चटा दिया था. इस युद्ध में मोहम्मद गौरी की इतनी बुरी तरह से हार हुई थी कि इसको अपने अंग रक्षकों के साथ अपनी जान बचाकर भागना पड़ गया था.

रानी नायकी देवी के पिता का नाम महामंडलेश्वर परमादी था. इनके पिता कदंब राज्य के शासक थे. रानी नायकी देवी बचपन से ही घुड़सवारी तथा युद्ध के गुणों में निपुण थी. इनकी शादी गुजरात के राजा अजयपाल के साथ रचाई गई थी. हालांकि, राजा अजयपाल ज्यादा दिनों तक जिंदा नहीं रह पाए. यह अपने राज सिंहासन पर केवल और केवल 4 वर्ष ही राज कर पाए थे इसके बाद इनका निधन हो गया. जिसके बाद इनकी गद्दी पर इनके पुत्र मूलराज द्वितीय को बैठा दिया गया और वही रानी नायकी देवी को राजमाता का गद्दी दे दिया गया था.

वही बात करें मुस्लिम शासक मोहम्मद गौरी की तो यह अपने जमाने का सबसे ज्यादा ताकतवर शासकों में से एक था. इसकी नजर सबसे पहले गुजरात पर पड़ी थी. ऐसे में इसने गुजरात फतह करके भारत में घुसने का प्लान बनाया और इसने गुजरात से युद्ध करने का रणनीति तैयार किया मोहम्मद गौरी के पास एक बहुत बड़ी सेना थी. वहीं दूसरी तरफ रानी नायकी ने अपने आसपास के कई राजाओं से मोहम्मद गौरी के साथ युद्ध करने के लिए मत मांगे लेकिन जालौर के चाहमान वंश और अरबुदा के परमार के अलावा किसी ने भी इनकी मदद नहीं की.

अंत में रानी नायकी ने मोहम्मद गौरी को हराने का प्लान तैयार किया और इसके बाद कसाहरादा का युद्ध हुआ और इस युद्ध में रानी नायकी और इनके पुत्र खुद भी अपने घोड़े पर सवार होकर लड़ने गए थे और इस युद्ध को रानी नायकी ने जीत लिया. आपको बता दें कि इस युद्ध में मोहम्मद गौरी की हालत इतनी बुरी हो गई थी कि उसको अपना जान बचाकर भागना पड़ा था. मोहम्मद गौरी अपने अंग रक्षकों के साथ अपना जान बचाकर भाग गया. हालांकि बाद में मोहम्मद गौरी ने पंजाब के जरिए भारत में घुसने का प्लान किया और वह इस प्लान में सफल साबित हुआ. हालांकि रानी नायकी के इस युद्ध के बारे में इतिहास में बहुत कम जानकारी मिलेगी. इतिहास में रानी नायकी को इतना सम्मान नहीं मिला है जितना मिलना चाहिए था.

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