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10 वीं में पढ़ने वाली लड़की ने पॉकेट मनी से इकट्ठे किए डेढ़ लाख, बच्चों के लिए बना दी लाइब्रेरी

जब तक बच्चे की पढ़ाई लिखाई होती है तब तक वह पॉकेट मनी के लिए अपने घरवालों पर आश्रित होता है. और जब उसकी कहीं नौकरी लग जाती है तो वह घरवालों से पैसा लेना बंद कर देता है लेकिन एक ऐसी भी लड़की है. जिसने दसवीं कक्षा में पढ़ाई करते हुए एक ऐसा कारनामा कर दिया है. जिसके बारे में लोग जान रहे हैं तो इसको तारीफें मिल रही है. जी हां, इस लड़की ने पॉकेट मनी से मिले पैसों को जुटाकर लाइब्रेरी खोल दी है. इस लड़की ने यह कारनामा करके दिखा दिया है. अगर दिल में कुछ करने का जुनून हो तो उम्र सिर्फ एक संख्या होती है. आप किसी भी उम्र में कुछ भी हासिल कर सकते हैं.

जिस लड़की के बारे में हम आपसे बात कर रहे हैं. उनका नाम ईशानी है. ईशानी दिल्ली से ताल्लुक रखती हैं और दसवीं कक्षा में पढ़ती हैं लेकिन इन्होंने दसवीं कक्षा में पढ़ते हुए एक बेहद दिलचस्प और अच्छा काम किया है. इन्होंने गाजियाबाद के डासना इलाके में बच्चों के पढ़ने के लिए पॉकेट मनी के द्वारा इकट्ठे किए गए पैसों के दम पर एक लाइब्रेरी खोल दी है. ईशानी बताती हैं वह एक बार स्कूल की ओर से राजस्थान एक ट्रिप के लिए गई थी जहां पर उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला.

यहां पर इन्होंने देखा कि कुछ बच्चे जगह ना होने की वजह से पढ़ाई नहीं कर पाते हैं और उन्हें लगा कि यह समस्या उनके इलाके में भी होगी. इसी समस्या को देखते हुए उन्होंने पिता के द्वारा दी गई पॉकेट मनी को इकट्ठा करना शुरू कर दिया और अब इस लाइब्रेरी में उन्होंने कुछ पैसे का योगदान दिया है.

ईशानी ने पॉकेट मनी के दम पर कुछ पैसे जुटा लिए थे अब इनके दिमाग में प्लानिंग चल रही थी कि वह इन पैसों के दम पर एक लाइब्रेरी खोल दें लेकिन इसके लिए उन्हें परमिशन की जरूरत थी. इसलिए यह एक कार्यक्रम में एसडीएम साहिबा से मिलने पहुंच गई. जहां इनकी मुलाकात एसडीएम से हुई. एसडीएम से इन्होंने इस काम को करने की परमिशन मांगी. वहीं एसडीएम ने भी इस छोटी बच्ची को निराश नहीं किया और इसके आईडिया पर काम करने की बात कही.

कुछ ही समय बाद एक खंडहर पड़े घर को किताब घर में तब्दील कर दिया गया. बाकायदा इसका उद्घाटन भी इलाके के अधिकारियों के द्वारा किया गया. बता दें, ईशानी ने इस लाइब्रेरी के बनने के लिए डेढ़ लाख रुपए दिए हैं. इस लाइब्रेरी में एक साथ 35 बच्चे बैठकर पढ़ सकते हैं.

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