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मां ने मजदूरी करके पढ़ाया, झोपड़ी में बचपन बीता अब बेटी बन गई है डिप्टी मेयर

सच्चे दिल से की गई मेहनत कभी जाया नहीं जाती. अगर आप सच्चे दिल से परिश्रम करते हैं और आपकी ईमानदारी आपके साथ रहती है तो एक समय आता है. जब आप सफलता के नए नए आयाम स्थापित कर देते हैं. ओड़ीसा से संबंध रखने वाली दमयंती मांझी भी उन्हीं लोगों में शामिल हैं. जिनकी दृढ़ इच्छाशक्ति और हौसला काफी मजबूत था. अब यही वजह है वह इसी के दम पर अपने इलाके की पहली ऐसी मेयर बन चुकी हैं. जो आदिवासी समाज से संबंध रखती हैं.

दमयंती मांझी ने महज 21 वर्ष की उम्र में ही कारनामा करके लोगों को अपनी मेहनत का नमूना पेश कर दिया है इन्होंने बीजेडी की टिकट पर नगर निगम का चुनाव लड़ा था और इस चुनाव में इन्हें भारी-भरकम वोट मिले. जिसके दम पर यह इलाके की मेयर बन गई है. इन्होंने इस इलाके की कुर्सी भी संभाल ली है और यहां बतौर मेयर काम कर रही हैं, लेकिन आप कहेंगे इसमें कौन सी नई बात है. तो चलिए आपको यह भी बता देते हैं. दमयंती मांझी की उम्र महज 21 वर्ष है. यह आदिवासी समाज से ताल्लुक रखती हैं. इनके पास ना संसाधन थे और ना ही पैसा था लेकिन इन्होंने लोगों के दिलों में अपनी पहचान बनाई और लोगों ने भी उनका साथ दिया जिसके दम पर यह मेयर बन गई हैं.

भले ही दमयंती मांझी अब मेयर बन चुकी है लेकिन इनका शुरुआती जीवन काफी संघर्ष भरा रहा है. इनका जन्म झुग्गी झोपड़ी में हुआ और उनका बचपन भी इन्हीं झुग्गी झोपड़ियों में बीता. लेकिन जब इनका पाला शिक्षा से पढ़ा तो इनकी जिंदगी ने बदलना शुरू किया. यह उस इलाके में आदिवासी समाज से सबसे ज्यादा पढ़ी हुई लड़की हैं. बता दें, दमयंती मांझी के पिता नहीं है. इनके पालन-पोषण की जिम्मेदारी इनके मां के कंधों पर ही है. इनकी मां ने इन्हें मजदूरी करके पढ़ाया था. अब यह इलाके की मेयर बन गई है तो घर में खुशी का माहौल है बता दें, उन्होंने मार्च में नगर निगम का चुनाव जीता था.

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