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IIM लखनऊ से किया MBA, फिर लाखों की नौकरी छोड़ किया नया स्टार्टअप, आज कर रहीं है 60 करोड़ का टर्नओवर

हमारे देश को आजाद हुए आज 75 वर्ष से ज्यादा का समय बीत चुका है. बावजूद उसके हमारे देश में कई ऐसे लोग हैं जो महिलाओं को बेहद कमजोर समझते हैं. ऐसे लोगों का मानना है कि महिलाएं सिर्फ घर की चार दीवारों में रहने के लिए होती हैं लेकिन ऐसे लोगों के लिए कई महिलाओं ने उदाहरण सेट किए हैं और उन्हीं महिलाओं की लिस्ट में शामिल है पल्लवी मोहाडीकर. दरअसल, पल्लवी मोहाडीकर ने उन लोगों का मुंह बंद कर दिया है जिनको लगता है कि महिलाएं सिर्फ घर चलाने का काम करती हैं.

पल्लवी मोहाडीकर का जन्म नागपुर में हुआ था. इनका बचपन काफी गरीबी में बीता था. दरअसल इनके परिवार की आर्थिक स्थिति ज्यादा अच्छी नहीं थी. बावजूद इनके पिता ने इनको पढ़ने के लिए स्कूल भेजा और इन्होंने भी खूब मन लगाकर पढ़ाई किया और फिर इन्होंने आईआईएम लखनऊ में एडमिशन लेकर एमबीए किया. IIM लखनऊ से पढ़ाई करने के बाद से इन्हें एक बहुत अच्छी नौकरी मिल गई और इनका जीवन पटरी पर आ गया लेकिन यह अपने नौकरी से खुश नहीं थी.

क्योंकि यह एक ऐसे परिवार से आती थी जहां पर कोसा सिल्क की मदद से हैंडीक्राफ्ट साड़ियां बनाई जाती थी और यह चाहती थी कि इन साड़ियों को बनाने वाले बुनकरों की हालत सही हो जाए. यही कारण है कि इस बात के वजह से पल्लवी मोहाडीकर अक्सर चिंता में रहती थी. हालांकि साल 2017 में इन्होंने अपनी नौकरी छोड़ दी और बुनकरों की जिंदगी संवारने के लिए साल 2017 में एक नया स्टार्टअप किया. इस स्टार्टअप में इनके पति डॉ अमोल पटवारी ने इनकी बहुत ज्यादा मदद की थी.

साल 2017 में अपने स्टार्टअप के बाद से पल्लवी मोहाडीकर ने कुल 180 बुनकरों की एक टीम तैयार की और नए नए प्रोडक्ट का निर्माण किया. इसके बाद इन्होंने अपने प्रोडक्ट का मार्केटिंग करना शुरू किया और आज यह करोड़ों की टर्नओवर कर रही हैं. जी हां बात करें पल्लवी मोहाडीकर की कंपनी के 1 साल की टर्नओवर की तो इनकी कंपनी 1 साल में 60 करोड़ से ज्यादा की टर्नओवर कर लेती है. और तो और इनकी कंपनी में काम करने वाले बुनकरों की जिंदगी भी बदल चुकी है.

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