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मंगल गोचर के प्रभाव : रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और कारखानों में अधिक उत्पादन होगा, लेकिन दुर्घटनाएं भी बढ़ेंगी

मंगल ने 10 मई को कर्क राशि में प्रवेश किया और 1 जुलाई तक इसी राशि में रहेगा। इस दौरान शनि से शत्रु षडाष्टक योग भी बनेगा। मंगल, शक्ति का प्रतीक ग्रह, 51 दिनों के लिए अपने शत्रु मिथुन से अपने अवर कर्क में चला गया है।ज्योतिष शास्त्र में भूमि पुत्र मंगल को अग्नि का कारक ग्रह माना गया है। इसी कारण चंद्रमा की कर्क राशि में जाने पर मंगल कमजोर हो जाता है। चंद्रमा जल का अधिपति है। इस प्रकार अग्नि और जल का संयोग नहीं होता इसलिए मंगल का अशुभ प्रभाव कर्क राशि में अधिक होता है।

ग्रहों की इस स्थिति के कारण कारखानों और शनि से संबंधित चीजों का कारोबार गति पकड़ेगा। जिससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। रक्षा क्षेत्र, अनुसंधान संस्थानों और खनिज संपदा से जुड़े कार्यों में भी तेजी आएगी। आयात-निर्यात का काम बढ़ेगा। फैक्ट्रियां ज्यादा उत्पादन करेंगी। लोहा, सीमेंट, कोयले के निर्यात में बढ़ोतरी से भी इनके दाम बढ़ सकते हैं। शनि संबंधित क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

शनि और मंगल की इस अशुभ युति के कारण अचानक दुर्घटनाएं और राजनीतिक विरोध बढ़ सकता है। प्राकृतिक आपदाएं भी लोगों और धन की हानि कर रही हैं। लोगों में आपसी मतभेद बढ़ेंगे। मंगल-शनि की युति राजनीतिक दृष्टि से शुभ नहीं है। विरोधी दल सत्ता पक्ष पर दबाव बढ़ाएंगे।

ये कदम उठा सकते हैं: मंगल ग्रह के अशुभ प्रभाव को दूर करने के लिए हनुमानजी की पूजा करनी चाहिए। मंगल क्रीं क्रीं स: भौमाय नम: मंत्र का जाप करें। मंगलवार का व्रत करें। लाल कपड़े में दाल या शहद रखकर दान करें। मंगलवार के दिन बैल को गुड़, गेहूं, लाल मसूर की दाल खिलाना शुभ फलदायी होता है। मंगलवार के दिन एक बार बिना मीठा किया हुआ भोजन करें।