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पिता मोची थे मां करती थी दूसरे को खेतों में मजदूरी, बेटे ने शुरू किया कंपनी, हर महीने करता है 500 करोड़ का बिजनेस

हमारे देश में जाति की भेदभाव काफी समय से चली आ रही और इस जाति के भेदभाव के चक्कर में कई लोगों को नीचे दबा दिया जाता है. लेकिन इन्हीं में कई लोग अपने शिक्षा के बदौलत इस भेदभाव से काफी ऊपर निकल जाते हैं.जी हां ठीक कुछ ऐसी ही कहानी है अशोक खड़े की. इनके पिता पेशे से एक मोची थे तो वहीं इनकी मां दूसरे के खेतों में मजदूरी का काम करती थी लेकिन अशोक खड़े ने परिस्थितियों के आगे कभी हार नहीं मानी और इन्होंने अपने शिक्षा के बदौलत अपने व्यापार से अपनी गरीबी को दूर कर दिया आज अशोक खड़े 4500 से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रहे हैं और इनकी कंपनी सालाना 500 करोड रुपए की व्यापार करती है.

अशोक खड़े का जन्म महाराष्ट्र के सांगली जिले के पेड गांव में हुआ था. अशोक का जन्म एक दलित परिवार में हुआ था और इनके जाति के लोगों का पारंपरिक काम मृत जानवरों के खाल निकालने का था. ऐसे में परिवार का पेट भरना भी मुश्किल हो जाता था. काफी समय गांव में रहने के बाद अशोक के पिता ने मुंबई जाने का फैसला किया और यहां पर जाकर इनके पिता मोची का काम करने लगे वही अशोक की मां दूसरों की खेतों में मजदूरी का काम करती थी.

अशोक को बचपन में ही पता चल गया था कि इस गरीबी को सिर्फ और सिर्फ शिक्षा के माध्यम से दूर किया जा सकता है. दसवीं तक की पढ़ाई अपने गांव में पूरा करने के बाद अशोक अपने भाई और अपने पिता की मदद करने के लिए मुंबई चले आए और यहां पर इन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखते हुए काम करना शुरू कर दिया. इसके बाद इन्हें 1983 में जर्मनी जाने का मौका मिला और यहीं पर इन्हें एण्टरप्रिन्योरशीप के बारे में पता चला.

जिसके बाद वापस इंडिया आकर इन्होंने 1995 में अपनी कंपनी शुरू कर दी. इनके कंपनी का नाम DAS Offshore है. इस कंपनी को इन्होंने अपने भाइयों के साथ मिलकर शुरू की थी और इसका नाम भी कुछ इसी प्रकार रखा है. जी हां DAS मतलब दत्ता, अशोक और सुरेश है. इस कंपनी की शुरुआत करने के बाद अशोक ने कभी भी पीछे मुड़कर नहीं देखा और आज वह अपनी कंपनी की मदद से सालाना 500 का बिजनेस करते हैं और इन्होंने 4500 से ज्यादा लोगों को रोजगार का अवसर भी प्रदान किया है.

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