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भारत का एक ऐसा किसान जिसने काले चावल, नीले आलू और लाल भिंडी उगाई, खेती की मदद से कमाता है लाखों रुपया

चाहता है. लेकिन कई बार ऐसा नहीं हो पाता है हालांकि लोग अपने जीवन मे कुछ ना कुछ बेहतर जरूर कर लेते हैं. आज के इस लेख में हम आपको एक ऐसे किसान से मिलवाने वाले हैं जो बनना तो डॉक्टर चाहते थे हालांकि इनकी किस्मत ने इनका साथ नहीं दिया और मजबूरनबस इन्हें एक किसान बनना पड़ा लेकिन इन्होंने किसान बनने के बाद से वो काम कर दिया कि पूरी दुनिया में इनका नाम हो रहा है और तो और इन्हें कई बार सार्वजनिक मंच पर सम्मानित भी किया जा चुका है. जी हां हम बात कर रहे हैं मिश्रीलाल राजपूत की जिन्होंने लाल भिंडी उगाकर काफी ज्यादा लोकप्रियता हासिल की है.

मिश्रीलाल राजपूत का जन्म एक किसान के परिवार में हुआ था लेकिन जैसे-जैसे मिश्रीलाल राजपूत बड़े होते गए यह धीरे-धीरे खेती से दूर भागने लगे. इन्हें खेती करना बिल्कुल भी पसंद नहीं था और यह डॉक्टर बनना चाहते थे. यही कारण है कि इन्होंने बारहवीं तक अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद से मेडिकल का पढ़ाई करने का फैसला किया. हालांकि, आपको तो पता ही होगा कि किस्मत हर किसी का साथ नहीं देती है और ऐसा ही कुछ हुआ था इनके साथ किन्हीं कारणों की वजह से इन्हें अपनी पढ़ाई बंद करनी पड़ी और मजबूरन बस इन्हें खेती करना पड़ा.

बता दें कि अपने डॉक्टर बनने के सपने के टूटने के बाद से मिश्रीलाल राजपूत ने ज्यादा दुख नहीं जताया उन्होंने खेती मन लगाकर करनी शुरू कर दी और उन्होंने खेती में कई नए नए प्रयोग करने शुरू कर दिए जैसे मिश्रीलाल राजपूत ने लाल भिंडी उगाए, हाइब्रिड टमाटर, नीले आलू, काले चावल और अन्य फसलों के साथ कई नए नए प्रयोग किए और इस प्रयोग में यह सफल साबित हुए.

जिसके बाद लोगों ने भी इनकी तारीफ की और यह ऐसे ही बेहतरीन प्रयोग करते गए. ऐसे में चारों तरफ इनकी चर्चा होने लगी यही कारण है कि साल 2003 में मध्य प्रदेश कृषि भूषण पुरस्कार से भी इन्हें सम्मानित किया गया था. इतना ही नहीं बात करें अगर कमाई की तो मिश्रीलाल राजपूत ने पिछले साल केवल फूलगोभी की खेती से साढ़े चार लाख रुपया से भी ज्यादा की कमाई की थी.

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