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पिता बेचते थे जूता, आर्थिक तंगी में बीता बचपन, बेटे ने कड़ी मेहनत से रचा इतिहास, UPSC में हांसिल की 6वीं रैंक

UPSC भारत की सबसे कठिन परीक्षा मानी जाती है. इस परीक्षा को हर वर्ष लाखों लोग देते हैं लेकिन सफलता सिर्फ चंद लोगों को ही मिलती है और उन्हीं चंद लोगों में शामिल है शुभम गुप्ता. दरअसल, शुभम गुप्ता एक बहुत ही गरीब परिवार से तालुकात रखते हैं. शुभम गुप्ता का बचपन का जीवन काफी कठिन भरा रहा है. इनके पिता एक जूते की दुकान चलाते थे और ऐसे में उस दुकान से इनके परिवार का पालन पोषण भी संभव नहीं हो पाता था.

जिसके बाद शुभम के पिता ने जयपुर से महाराष्ट्र आने का फैसला किया. शुभम जब आठवीं क्लास में थे तभी इनके पिता महाराष्ट्र चले गए थे. यह बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज और मेहनती थे. शुभम को कॉमर्स में काफी ज्यादा दिलचस्पी थी यही कारण है कि इन्होंने दसवीं और बारहवीं कॉमर्स से पढ़ाई की इसके बाद यह दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना चाहते थे लेकिन वहां पर एडमिशन नहीं हुआ इसके बाद इन्होंने किसी और कॉलेज से अपनी ग्रेजुएशन और एमकॉम की पढ़ाई पूरी की.

बता दें कि शुभम ने एक इंटरव्यू में बताया था कि इनके पिता ने बचपन में ही इन्हें बड़े अफसर बनने की सलाह दी थी. जिसके बाद इन्होंने अपने दिमाग में बैठा लिया था कि यह 1 दिन एक बड़ा ऑफिसर बन के रहेंगे. जब शुभम की एमकॉम की पढ़ाई खत्म हुई तब इन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की. पहले अटेम्प्ट में यह असफल साबित हुए.

दूसरे अटेम्प्ट में इन्होंने 326वीं रैंक हासिल की लेकिन शुभम इससे खुश नहीं हुए इसके बाद इन्होंने अपनी तैयारी फिर से शुरू की और तीसरा अटेम्प्ट दिया. तीसरा अटेम्प्ट शुभम के लिए सही नहीं गया और तीसरे अटेम्प्ट में भी यह असफल साबित हुए. हालांकि इसके बाद शुभम ने फिर से कड़ी मेहनत करनी शुरू की और चौथा अटेम्प्ट में शुभम ने 6वीं रैंक लाकर पूरे देश में अपने पिता का नाम रोशन कर दिया.

कभी आर्थिक तंगी से जूझने वाले शुभम आज पूरे देश के लिए एक मोटिवेशन के रूप में उभर चुके हैं. शुभम ने इस सफलता को कड़ी मेहनत के वजह से प्राप्त की है. शुभम का कहना है कि अगर आप किसी भी चीज को ठान लेते हैं तो उस चीज में आपको सफलता जरूर मिलती है. बस जरूरत होती है कड़ी मेहनत की. अगर आप कड़ी मेहनत करते हैं तो एक ना एक दिन आप जरूर सफल होंगे.

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