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फुटबॉल इतिहास की 6 काली घटनाएं जिनपर आज भी लोग बात करने से कतराते हैं

भले ही हम भारतीयों के रग-रग में क्रिकेट दौड़ता है भारत में क्रिकेट को बेहद पसंद किया जाता है, लेकिन दुनियाभर के परिदृश्य को देखें तो फुटबॉल बेहद पसंद की जाती है. फुटबॉल का गेम कई देशों के लिए मुख्य तौर पर खेला जाता है. इस आर्टिकल में हम आपको कुछ ऐसी घटनाओं के बारे में बताने वाले हैं. जो फुटबॉल मैच के दौरान हुई थी और इन घटनाओं को आज तक याद किया जाता है. इन घटनाओं की वजह से उस समय का माहौल काफी गर्म हो गया था. अब तक के फुटबॉल खेल में कई काले दिन रहे हैं. आज हम आपको कुछ ऐसे इतिहास के काले दिनों के बारे में बताने वाले हैं. जिनके बारे में कोई भी याद करना नहीं चाहता है.

साल 2012 में हुए मिस्त्र के दंगों को फुटबॉल इतिहास के काले दिनों की सूची में शामिल किया जाता है. इस दिन पोर्ट सईद स्टेडियम में दो टीमों के बीच मैच हुआ. किसी ने नहीं सोचा था कुछ ही समय बाद यहां विजेता टीम खुशी का माहौल दंगे के रूप में सेलिब्रेट करेगी. उस समय चश्मदीदों ने बताया कि विजेता टीम के पास पिस्तौल राइफल और भी जैसे हथियार थे. सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक इन दंगों में 900 से अधिक लोग घायल हुए थे.

8 जनवरी 2010 फुटबॉल इतिहास के काले दिन की सूची में शामिल किया जाता है. इस दिन को फुटबॉल इतिहास के काले वाकये के रूप में दर्ज हुआ था. जिसे आज भी कोई याद नहीं करना चाहता है. बता दें टोगो की टीम पर उस वक्त हमला हुआ था. जब वह टीम बस से मैच खेलने जा रही थी. इस दौरान आतंकवादियों ने हमला कर दिया. इस हमले में 3 लोगों की जान चली गई थी. इसके बाद पूरा बवंडर खड़ा हो गया था.

वक्त साल 2002 था और नवंबर का महीना था. एक मैच में लुई फिगो नाम के खिलाड़ी किक मारने की फिराक में थे. उसी दौरान एक समर्थक की ओर से इनके ऊपर शुगर का सिर फेंका गया था. जिसके बाद काफी बवंडर खड़ा हो गया था. इस दौरान सारे खिलाड़ियों को मैदान से बाहर निकाल दिया गया था. वहीं कई सारे दर्शक काफी गुस्सा गए थे और काफी भयावह स्थिति बन गई थीं.

साल 1995 में हुई इस घटना को भी फुटबॉल इतिहास के काले दिनों में दर्ज किया जाता है. दरअसल, इस साल फ्रांस और एक और टीम के बीच फुटबॉल मैच चल रहा था. इसी दौरान कैंटोना नाम के फुटबॉल खिलाड़ी के ऊपर एक दर्शक ने नस्लभेद टिप्पणी कर दी थी. जिसके बाद यह काफी गुस्सा आ गया और उसने उसको लात मार दी थी. इसके बाद इन पर बैन लगा दिया गया. हालांकि, यह बैन कुछ ही समय बाद हटा दिया गया था.

27 अप्रैल 1993 को जामीबिया की फुटबॉल टीम के साथ एक दर्दनाक विमान हादसा हुआ था. इस विमान हादसे को आज भी फुटबॉल इतिहास के काले दिनों में शामिल किया जाता है. इस हादसे में फुटबॉल खिलाड़ियों समेत कुल 30 लोगों की मौत हुई थी. इसमें 18 फुटबॉल खिलाड़ी शामिल थे. यह टीम अपना वर्ल्ड क्वालीफायर मैच खेलने जा रही थी.

1 जुलाई 1994 को गलत गोल करने की वजह से एक फुटबॉल खिलाड़ी की अज्ञात लोगों ने हत्या कर दी थी उस समय इनके बारे में कोई जानकारी हासिल नहीं हुई थी लेकिन पता चला तो पाया गया कि इस खिलाड़ी ने एक टीम के खिलाफ गलत गोल कर दिया था. जिसके बाद उनकी टीम को बढ़त मिल गई और इसी से गुस्साए कुछ लोगों ने इनको अकेले पाकर एक मैदान में गोलियों से भून दिया था. इनके छह गोली लगी थी. जिसके बाद उनका निधन हो गया.

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